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Showing posts from August, 2019

राजनीति और विकास को समझें कश्‍मीरी युवा

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ADITYA DEV PANDEY सात दशकों से कश्‍मीर स्‍वेच्‍छा की राजनीति के मार्ग पर चल विकास को पाने की जद्दोजहद में लगा रहा। पर वास्‍तव में यह स्‍वेच्‍छा और स्‍वशासन का नियम किसी भी कश्‍मीरी का अधिकार कभी नजर नहीं आया। 70 वर्षों से कश्‍मीरी आवाम सड़क ,  पानी ,  शिक्षा ,  रोजगार ,  उद्योग ,  व्‍यापार आदि को लेकर तंगहाल ही रहे। कुछ युवा पाकिस्‍तान के आतंकी विचार के शिकार हो विकास की नई इबारत लिखने में जुट गए। इससे हालात तो नहीं सुधरे बल्कि ये युवा खुद ही दो मुल्‍कों की राजनीति की कठपुतली बन गए। देखते ही देखते ये युवा अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी संगठनों का कंधा बनकर विश्‍व मंच पर आलोचना के शिकार होने लगे। रही बात विकास  और अधिकार की तो वह दलदल की तरह जस की तस बनी रही। इतिहास पर नजर डालें तो आतंकियों के पनाहगाह पाकिस्‍तान की मंशा हमेंशा से सिर्फ इतनी ही रही कि वह भारत में कभी स्‍थीरता न आने दे। पाक एक ऐसा देश जो आर्थिक , सामाजिक ,  राजनीतिक और सैन्‍य अव्‍यवस्‍थाओं से जूझ रहा है। दिवालिया होने के कगार पर है। ऐसे में उसे राष्‍ट्र मानना भी मूर्खता ही होगी। यह जानने के ब...

चिंता और तनाव का एनकाउंटर करें

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चिंता और तनाव का एनकाउंटर करें    स्‍कूल , कॉलेज हो या दफ्तर बात-चित और प्रजंटेशन को लेकर दिमाग चक्‍कर काटने लगता है। घबराहट और तनाव में पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में बने बनाए काम बिगड़ने लगते हैं। हालात आपके हाथ से निकलने लगता है। इस अवस्‍था को एनकाउंटर स्‍ट्रेस कहते हैं। यह पढ़ाई , करियर और नौकरी के साथ आपके व्‍यक्तित्‍व को काफी प्रभावित करता है। इसके अलावा यह तब और घातक रूप ले लेता है जब मीटिंग या समूह में कोई अप्रत्‍याशित व्‍यक्ति बैठा हो या वो जिसे आप बिल्‍कुल पसंद नहीं करते। आप उसके सामने असहज महसूस करते हों। ऐसे में डाबर का स्‍ट्रेसकॉम आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके सेवन से आप अपने मनोबल को बढ़ाते हुए ऐसी परिस्थितियों पर विजय पा सकते हैं।  अत्‍यधिक तनाव लेने से काम के साथ आपकी सेहत भी बिगड़ सकती है। एनकाउंटर स्‍ट्रेस आपको भावनात्‍मक तौर पर तो प्रभावित करता ही है साथ ही गंभीर बीमारियों को दावत भी देता है। कई शोध यह बताते हैं कि ढ़ेरों बीमारियों के पीछे तनाव मुख्‍य कारक के तौर पर काम करता है। इससे आप मधुमेह , रक्‍तचाप , दिल की बीमारी , माइ...

कहीं तनाव से तो नहीं आपका तन हो रहा बेदम

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   तनाव से तन और मन हो रहे बीमार -    ADITYA DEV   हमारे जीवन की परिस्‍थितियां तनाव यानी स्‍ट्रेस की जिम्‍मेदार हो सकती हैं। तनाव के कई रूप हैं। इनमें सबसे घातक है टाइम स्‍ट्रेस। क्‍योंकि यह प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रूप से हमारे जीवन और जीवीकोपार्जन दोनों को प्रभावित करता है। बेरोजगारी , पढ़ाई , परीक्षा , कंपटिशन की तैयारी , नौकरी में दबाव , प्रमोशन , ईएमआई , लोन , बॉस की फटकार , बच्‍चों की फीस और जरूरतें आदि ऐसे दबाव जो टाइम स्‍ट्रेस को जन्‍म देते हैं। यह सिचूएशनल स्‍ट्रेस या स्‍थितिगत तनाव के अंतर्गत आता है। यह आपको तब परेशान करता है जब आप इन परिस्‍थितियों पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं। समय पर काम करने का दबाव बढ़ जाता है। इसके बाद आप दबाव पर दबाव लेने लगते हैं और फीडबैक के तौर पर कुछ भी साकारात्‍मक चीज सामने नहीं आती है।     तनाव कोई भी हो , किसी भी प्रकार का हो, यह सिर्फ आपको बीमार ही कर सकता है। आपकी सेहत और कार्य झमता को गिराता है। ऐसे में इन परिस्‍थितियों से समझदारी से निपटने की जरूरत है। हालांकि तनाव सिर्फ परेशानी ही नही...

सिचुएशनल स्ट्रेनस से जीवन की रक्षा

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ADITYA DEV काम के बढ़ते दबाव या दोस्‍त , साथी , सहकर्मी से मतभेद को लेकर जो तनाव जन्‍म लेता है उसे सिचुएशनल स्‍ट्रेस कह‍ते हैं। यह अवसाद आपको आमतौर पर तब प्रभावित करता है जब आपका किसी से मतभेद हो जाता है। या फिर आपके समूह , सोसाइटी या दफ्तर में आपकी छवि खराब की जाने लगी हो। आपकी प्रतिष्‍ठा में कमी आने के चलते तनाव आप पर हावी होने लगता है। ऐसे में आपका हर काम बिगड़ने लगता है और आप अवसाद से ग्रस्‍त हो कुंठा के गर्त में चले जाते हैं।          सिचुएशनल स्‍ट्रेस के बारे में बात करें तो आज हालात ऐसे हैं कि इस अवसाद से हर तीसरा व्‍यक्ति प्रभावित है। ऐसे में इसको इग्‍नोर करने का मतलब है अपने जीवन से खेलना। यह पद से बर्खास्‍त होने या फिर टीम वर्क के दौरान कोई बड़ी गलती सामने आने से भी आपको प्रभावित कर देता है। सिचुएशनल स्‍ट्रेस पर यदि विजय पाना हो तो थोड़ी समझदारी , योग , मेडिटेशन , और स्‍ट्रेसकॉम का सहयोग कारगर साबित होगा। स्‍ट्रेसकॉम हर तनाव , कुंठा और अवसाद को मात देने में माहिर है। ये लक्षण हैं इसकी पहचान -     आप अन...