गुनहगार


बड़ी तकल्लुफ सी थी जिन्दगी, प्यार कर मानों और तबाह कर लिये।
सुने चादर से लिपट खुदा के दर पर गए, मानो खुद को गुनहगार बना लिये।
रोते आए थे इस जहां में और इश्क में डूब जिं
दगी को आंसुओं का शैलाब बना लिये।
आधी जिंदगी खुशियां खोजने में बिता दी और बाकी गम को भूलाने में चले गए।
बड़ी दिलचस्पी थी अपने से, आज अपने से ही रूठ बेजान हो गए।
मेरा प्यार ही मेरी संजीवनी है, पर उसकी नफरत मेरी हार बन गए।
बड़ी तकल्लुफ सी थी जिंदगी, प्यार कर मानों और तबाह कर लिये।

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