सीलिंग के चाबुक से कराहती दिल्ली
आदित्य देव पांडेय
दिल्ली में बढ़ती आबादी आज अव्यवस्था का रूप लेती जा रही है। ऐसे में इससे जन्म लेने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरकार कई तरह की पहल करती रहती है। इसी क्रम में सीलिंग को भी सरकार एक साकारात्मक पहल मानती है। हालांकि इससे व्यापारियों और उद्योगपतियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि नगर निगम बिना नोटिस के अचानक कार्रवाई कर रही है। वहीं निगम नियमों की अनदेखी का हवाला दे कार्रवाई कर रही है। सीलिंग के चलते दिल्ली की 7 लाख दुकानें बंद हो जाएंगीं। निगम राजधानी के कई क्षेत्रों में तेजी के साथ सीलिंग का चाबुक चला रही है और इसे कड़ाई साथ पालन करा रही है। ऐसे में निगम कर्मियों को जहां छतरपुर आदि क्षेत्रों में व्यापारियों का विरोध सहना पड़ा। वहीं डिफेंस कॉलोनी के व्यापारियों को हाईकोर्ट ने सीलिंग से राहत न दे व्यवस्था को प्रमुखता पर रखने की चेतावनी दी है।
दिल्ली के छतरपुर इलाके में सीलिंग टीम को मार्बल व्यापारियों के कड़े विरोध ओर आक्रोश का सामना करना पड़ा। यहां क्षेत्र के व्यापारी और नागरिक सीलिंग के विरोध में सड़कों पर बैठ गए थे। लोगों की नाराजगी को देख निगम कर्मी उल्टे पैर लौट गए थे। दिल्ली के पॉश इलाके डिफेंस कॉलोनी के व्यापारियों को सीलिंग के मुद्दे पर हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने सीलिंग पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। फिलहाल अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी, डीडीए, एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दूसरी तरफ निगम का कहना है कि कारोबारी गलत कागजात दिखाते हैं और न्याय की गुहार लगाते हैं। ऐसे में कार्रवाई जरूर होगी। यह हर वर्ष होती है। व्यापारी नियमों का यदि पालन नहीं करेंगे तथा कागजात सही नहीं रखेंगे तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इससे बचने के लिए मात्र एक ही रास्ता है कि कागजात सही रखें और सरकार के नियमों का पालन करें।
विरोध का सामना करना पड़ रहा है टीम को
दिन भर की मशक्कत के बाद सीलिंग टीम को कई बाद खाली हाथ लौटना पड़ता है तो कई बार एक या दो संस्थानों पर ही कार्रवाई कर पाती है। इस मामले कें बारे में व्यापारियों ने बताया कि सीलिंग की कार्रवाई से पहले उन्हें न तो नगर निगम और न ही दिल्ली सरकार से किसी भी प्रकार का कोई नोटिस मिला। ऐसे में सीलिंग कैसे की जा सकती है। जबकि, सीलिंग टीम का कहना है कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के आदेशों की पालन कर रही है।
कार्रवाई से बचाने में जुटे
कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) व्यापारियों के बचाव में सामने आ गया है। संगठन ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से इस मामले में आगे आकर दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग से बचाने की मांग की है। कैट ने यह भी आग्रह किया है कि 31 दिसंबर से पहले संसद के सत्र में नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ लॉज (स्पेशल प्रोविजन) थर्ड अमेंडमेंट बिल को पारित किया जाए। इससे द्वितीय अमेंडमेंट बिल-2011 में प्रस्तावित अंतिम तारीख 31 दिसम्बर 2017 को आगे बढ़ाया जा सके। इस मुद्दे पर कैट ने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, राजनाथ सिंह एवं हरदीप पुरी से मिलने का समय भी मांगा है।
वर्जन
संसद के पारित कानून को मानने को सभी बाध्य हैं। नियमों को ताक पर रखते हुए बिना कोई नोटिस या सुनवाई का मौका दिए सीलिंग की जा रही है, जो व्यापारियों के मूल अधिकार के खिलाफ है।
- प्रवीण खंडेलवाल, राष्ट्रीय महामंत्री, कैट
हाईकोर्ट से भी राहत नहीं
दिल्ली के रिहायशी इलाके डिफेंस कॉलोनी के व्यापारी सीलिंग के मुद्दे पर हाईकोर्ट पहुंचे पर उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने सीलिंग पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया। हालांकि कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति, डीडीए, एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अवकाशकालीन न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी के समक्ष डिफेंस कॉलोनी के व्यापारियों ने याचिका दायर कर निगरानी समिति के दुकानों को सील करने के आदेश को रद्द करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने समिति के आदेश पर रोक न लगाते हुए विस्तृत सुनवाई की बात कही।
नियमों को लेकर सख्त
एमसीडी का कहना है कि उसने उन्हीं दुकानों को बंद किया है, जिन्होंने कन्वर्जन चार्ज जमा न कराकर मास्टर प्लान-2021 के नियमों का उल्लंघन किया। जिन्होंने अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा ग्राउंड फ्लोर से आगे बढ़ा लिया है उपर कार्रवाई जरूरी था। डिफेंस कॉलोनी में स्थित बाजार का पहले लैंड यूज शॉपिंग कम रेजिडेंशियल था, लेकिन मास्टर प्लान 2021 के आने के बाद इस मार्केट को व्यावसायिक इस्तेमाल के मकसद से पूरी तरह स्थानीय शॉपिंग सेंटर में तब्दील कर दिया गया।
दक्षिणी दिल्ली के 106 बाजार प्रभावित
एमसीडी के अनुसार, दक्षिणी दिल्ली में ऐसे 106 मार्केट हैं, जो कन्वर्जन चार्ज नहीं दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिती के चेयरमैन केजे राव ने बताया पूरी कार्रवाई न्यायगत होगी। किसी के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। सीलिंग से पहले हर बाजार में दुकानदार की स्थिति और नियम को देखा जाएगा। यदि कोई कमी मिलेगी तभी सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
फुटपाथ पर जमा पूंजी
दिल्ली में लाखों दुकानें पर ताला लग गया है फिर लगने की तैयारी में है। इसके अलावा कई स्थानों पर बैंकों के लॉकरों में बंद लोगों की जमा पूंजी भी सील हो गई। सिलिंग की कार्रवाई उस वक्त नियमों की धौस दे बैंकों के सैकड़ों ग्राहकों के लिए परेशानी बन गई, जब लोगों के लॉकर सड़क पर पहुंच गए। सबसे चौकाने वाली बात यहां यह है कि करीब-करीब सारे बैंकों के लॉकर बेसमेंट में हैं। ऐसे में ग्राहकों की परेशानी का जिम्मेदारी कौन लेगा। ओल्ड राजेंद्र नगर में बैंक के लॉकरों में करोड़ों रुपये की पूंजी जमा है। लॉकर को ग्राहक सबसे सुरक्षित जगह मानते हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने बेसमेंट में चल रहे बैंक के लॉकरों को सील कर दिया। बैंकों के सैकड़ों ग्राहकों के सवालों का बैंक मैनेजर से लेकर सीलिंग करने वाले इंजीनियर तक के पास कोई जवाब नहीं है। राजेंद्र नगर के बैंक में ये लॉकर करीब तीस साल से हैं। ऐसे में यह नियम पहले क्यों नहीं इन बैंकों को बताए गए या इनका निरीक्षण किया गया। इन्हें किसने एनओसी दी।
व्यापारियों में दशहत
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई निगरानी समिति की सीलिंग ड्राइव से जहां व्यापारी परेशान हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई भी राजनेता नहीं जाना चाहता और कारोबारियों के साथ खुद को खड़ा दिखाने की भी मजबूरी है। निगरानी समिति ने दक्षिणी दिल्ली में 40 से ज्यादा प्रॉपर्टी को भी सील कर दिया है। व्यपारियों का आरोप है कि जिस बसेमेंट का वो कमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं उसको भी सील किया जा रहा है। व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने कन्वर्जन चार्ज जमा करा दिया है, लेकिन फिर भी सीलिंग जारी है।
10 सल पहले का चार्ज मांगा
कारोबारियों ने बताया कि जिस प्रॉपर्टी को 2014 में खरीदा है उस पर भी 10 साल पहले का कन्वर्जन चार्ज मांगा जा रहा है। कारोबारियों ने कहा कि जब दुकान 2014 में ली है फिर 10 साल का कन्वर्जन क्यों दें। कारोबारियों की परेशानी इस बात से और बढ़ गई है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सामने उनकी समस्याएं कोई सुनने वाला नहीं है। उनका कहना है कि उनकी परेशानियों और पूर्व के नियमों के आधार पर विचार करने की जरूरत है। दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और विपक्ष में बैठीं बीजेपी-कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप तो लगा रही हैं पर इसका उपाय कोई नहीं सुझा रही हैं।
आखिर सीलिंग क्यों
राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य के लिए एमसीडी से मंजूरी लेनी पड़ती है। दिल्ली में अवैध निर्माण की शिकायतों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 2005 में एक्शन का आदेश दिया था। एमसीडी का लचीला रवैया देखकर मामला सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में अवैध निर्माण की सीलिंग करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद दुकानों या व्यावसायीक प्रॉपर्टी को सीलिंग से बचाने के लिए सरकार ने कन्वर्जन चार्ज का प्रावधान किया। व्यापारियों ने चार्ज देने में लापरवाही बरती। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने सिलिंग के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया।
निर्माण गिराने के आदेश हैं
कन्वर्जन चार्ज न देने वालों का निर्माण अवैध पाए जाने की स्थिति में उसे गिराने का सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश है। नगर निगम की यह कार्रवाई मास्टर प्लान-2021 का हिस्सा है। इसके तहत खान मार्केट और डिफेंस कॉलोनी जैसे पॉश इलाकों में कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा कनॉट प्लेस जैसे व्यावसायीक इलाके में भी कार्रवाई के आदेश हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बंद की घोषणा करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में दिल्ली नगर निगम कानून 1957 के मूलभूत प्रावधानों को ताक पर रख सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।
विधानसभा में रखा विवाद
15 जनवरी को दिल्ली की विधानसभा में सीलिंग विवाद का असर देखने को मिला। आप और बीजेपी के विधायकों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और नारेबाजी की। इससे करीब दो घंटे में कार्यवाही चार बार स्थगित भी हुई। इस दौरान विपक्ष के दो विधायकों को मार्शलों ने बाहर तक निकाल दिया था।
कारोबारियों का महाबंद
सीलिंग अभियान के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में कारोबारियों ने महाबंद का भी ऐलान किया। दिल्ली के अधिकतर छोटे व बड़े बाजार बंद रखे गए। पुरानी दिल्ली के सभी थोक व रीटेल बाजार बंद रहे। बाकी दिल्ली में भी दुकानदारों ने कारोबार बंद कर विरोध जताया। कारोबारी संगठनों के इस महाबंद को आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के अलावा बीजेपी का भी समर्थन मिला। इस बंद का ऐलान कारोबारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स और उसके सहयोगी व्यापारी संगठनों ने किया था। अन्य कारोबारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री (सीटीआई) व उससे जुड़े व्यापारी संगठन भी इसमें शामिल हैं।
यहां के व्यापारी नाराज
चांदनी चौक, खारी बावली, कश्मीरी गेट, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, नई सड़क, नया बाजार, श्रद्धानंद बाजार, लाहौरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज, खान मार्केट, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, पीतमपुरा, पंजाबी बाग, राजौरी गार्डन, तिलक नगर, उत्तम नगर, जेल रोड, नारायणा, कीर्ति नगर, द्वारका, जनकपुरी, दक्षिणी दिल्ली में ग्रेटर कैलाश, साउथ एक्सटेंशन, डिफेंस कॉलोनी, हौजखास, ग्रीन पार्क, युसूस सराय, सरोजिनी नगर, तुगलकाबाद, कालकाजी के अलावा यमुनापार के लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, मयूर विहार, शाहदरा, कृष्णा नगर, गांधी नगर, दिलशाद गार्डन, लोनी रोड, सहित प्रमुख बाजारों के बंद होने की सूचनाएं मिल रही हैं।
दो हजार संगठनों ने विरोध किया
व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बंद में दिल्ली के 2000 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने हिस्सा लिया। इसमें सात लाख से ज्यादा दुकानदार व प्रतिष्ठानों ने अपनी भूमिका निभाइ और विरोध जताया। दिल्ली के छह प्रमुख इलाकों व बाजारों में धरना व प्रदर्शन का भी आयोजत किया गया। इस आंदोलन का मुख्य फोकस पुरानी दिल्ली रहा।
गुस्से में कटोरा मार्च निकाला गया
सिलिंग के विरोध में करोल बाग के टैंक रोड पर चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के पदाधिकारियों व सदस्यों ने कटोरा मार्च निकाला। सीटीआई के संयोजक बृजेश गोयल व हेमंत गुप्ता ने बताया कि पहले केंद्र सरकार और अब दिल्ली की एमसीडी की वजह से राजधानी के व्यापारियों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे में उन्हें हाथ में कटोरा लेकर गली-गली घूमने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कन्वर्जन चार्ज के नाम पर परेशान कर रहे
सीटीआई के महासचिव रमेश आहूजा व राकेश यादव के अनुसार, कन्वर्जन चार्ज के नाम पर एमसीडी खासतौर से उत्तरी एमसीडी पुरानी दिल्ली के बाजारों को निशाना बना रही है। बता दें कि इन बाजारों का रिकॉर्ड 1962 से पहले का है। तिलक बाजार, खारी बावली केमिकल मर्चेंट असोसिएशन के प्रदीप गुप्ता का कहना है कि चांदनी चौक, लाल किला, खारी बावली, जामा मस्जिद, दरियागंज, किनारी बाजार आदि सभी पुराने शहर में आते हैं। ये सभी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में शुमार हैं। अब यहां कनवर्जन चार्ज की मांग करते हुए जबरन दुकानदारों का धंधा बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सरासर गलत है। इन बाजारों को देखने के लिए विदेशों से पर्यटक आते हैं। यह बाजार नहीं पर्यटन का भी प्रमुख हिस्सा है।
ये नेता विरोध में
सीलिंग अभियान के खिलाफ चल रहे इस बंद में पार्टियां भी शामिल हैं। आप की ओर से दिल्ली संयोजक गोपाल राय व्यापारियों के साथ में खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री इमरान हुसैन और चांदनी चौक की पूर्व विधायक अलका लांबा चांदनी चौक इलाके में धरना दे व्यापारियों की समस्या को उठा रहे हैं। हालांकि ये सभी स्पष्ट तौर पर विरोध नहीं करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में इसे एक राजनीतिक व्यवहार के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आप नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सभी 70 विधानसभाओं में सीलिंग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने माना कि सीलिंग से कारोबारी बुरी तरह त्रस्त हैं इसलिए इस बंद को उनका नैतिक समर्थन है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि उनकी पार्टी कारोबारियों के दुख के साथ है। हमारे नेता व कार्यकर्ता भी विभिन्न बाजारों में जाकर बंद के खिलाफ विरोध दर्ज करेंगे।
7 लाख व्यापारी नाराज
दिल्ली में हो रही सीलिंग के विरोध में 2000 से अधिक व्यापारिक संगठनों के 7 लाख से ज्यादा व्यापारी नाराज हैं। थोक बाजार और रिटेल बाजार सभी के ये व्यापारी नगर निगम की इस कार्रवाई से खासे नाराज हैं। इन 7 लाख व्यापारियों ने विरोध के तौर पर दिल्ली व्यापार बंद का आयोजन भी किया। जिसका सीधा असर छोटे दुकानदार, मजदूरों और ट्रांसपोर्टरों पर पड़ा। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि राजधानी के 60 से ज्यादा बड़े और बाजारों के व्यापारी नाराज हैं। इन व्यापारियों की मांग है कि सरकार दिल्ली के व्यापार को सीलिंग से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
अधिकारियों का आरोप
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर व्यापारियों की संपत्ति की जांच की तो पता चला कि जिन संपत्तियों को घर की तरह बसाया गया है, उसमें एक दो दिन में ही नए-नए बेड और सोफे सजाए गए हैं। इनका हूलिया हाल ही में बदला गया है। दुकान को व्यापारी बेडरूम बना रहा हैं तो कोई दफ्तर को घर के तौर पर प्रयोग कर रहा है। इस तरह के सबसे अधिक मामले पुराना राजेंद्र नगर में सीलिंग अभियान के दौरान देखने को मिला। जब अधिकारियों ने जांच की तो संपत्ति में व्यावसायिक गतिविधि होने की पुष्टि हुई। इसके अलावा विवादित संपत्तियों की जांच में यह भी सामने आया कि बिजली और पानी का मीटर कनेक्शन व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लिया गया है। कई जगह पर पानी का कनेक्शन घरेलू मिला।
पूरी दिल्ली में असर
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित सीलिंग कमिटी में शामिल डॉ. भूरे लाल का का कहना है कि दिल्ली में जरूरतों के अनुसार और नियमों के तहत सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है। कोई भी कार्रवाई नियम विरुद्ध नहीं हो रही है। डॉ. भूरे लाल ने कहा कि कई जगहों पर अप्रूवल प्लान और मौजूदा स्थिति को देखने के बाद तय हो रहा है कि सीलिंग कहां करें। विरोध के बावजूद इस समिति ने पिछली बार भी काम किया था और इस बार भी काम कर रहे हैं।
कन्वर्जन शुल्क पर बोले माकन
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने सीलिंग के विरोध में केंद्र सरकार से कन्वर्जन शुल्क 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से हर व्यपारी शुल्क दे सकेगा। उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को दिल्ली में हो रही सीलिंग और तोड़फोड़ के संबंध में पत्र भी लिखा। हालांकि इसका कोई असर दिखता नजर नहीं आया। इसे लोगों ने एक राजनीतिक हथकंडे के तौर पर ही देखा।
सीलिंग का मामला काफी उलझाउ : सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली में सीलिंग का मामला बेहद उल
झा हुआ है और इस मामले में व्यापक सुनवाई की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली सीलिंग मामले की सुनवाई के दौरान की। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिवक्ता अनीता शिनॉय और एडीएन रॉव को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) बनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वो एमिकस क्यूरी को हर सुनवाई पर 35 हजार दे।
- 2013 में सीलिंग के मामलों को हाईकोर्ट, निचली अदालतों और निगम के ट्रिब्यूनल को भेजा दिया था
- 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कुछ मामले की सुनवाई न्याय मित्र के द्वारा की जाएगी
- 2006 में भी एमसीडी ने बड़े पैमाने पर सीलिंग अभियान चलाया और हजारों दुकानों को सील कर दिया गया
दिल्ली में बढ़ती आबादी आज अव्यवस्था का रूप लेती जा रही है। ऐसे में इससे जन्म लेने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरकार कई तरह की पहल करती रहती है। इसी क्रम में सीलिंग को भी सरकार एक साकारात्मक पहल मानती है। हालांकि इससे व्यापारियों और उद्योगपतियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि नगर निगम बिना नोटिस के अचानक कार्रवाई कर रही है। वहीं निगम नियमों की अनदेखी का हवाला दे कार्रवाई कर रही है। सीलिंग के चलते दिल्ली की 7 लाख दुकानें बंद हो जाएंगीं। निगम राजधानी के कई क्षेत्रों में तेजी के साथ सीलिंग का चाबुक चला रही है और इसे कड़ाई साथ पालन करा रही है। ऐसे में निगम कर्मियों को जहां छतरपुर आदि क्षेत्रों में व्यापारियों का विरोध सहना पड़ा। वहीं डिफेंस कॉलोनी के व्यापारियों को हाईकोर्ट ने सीलिंग से राहत न दे व्यवस्था को प्रमुखता पर रखने की चेतावनी दी है।
दिल्ली के छतरपुर इलाके में सीलिंग टीम को मार्बल व्यापारियों के कड़े विरोध ओर आक्रोश का सामना करना पड़ा। यहां क्षेत्र के व्यापारी और नागरिक सीलिंग के विरोध में सड़कों पर बैठ गए थे। लोगों की नाराजगी को देख निगम कर्मी उल्टे पैर लौट गए थे। दिल्ली के पॉश इलाके डिफेंस कॉलोनी के व्यापारियों को सीलिंग के मुद्दे पर हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने सीलिंग पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। फिलहाल अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी, डीडीए, एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दूसरी तरफ निगम का कहना है कि कारोबारी गलत कागजात दिखाते हैं और न्याय की गुहार लगाते हैं। ऐसे में कार्रवाई जरूर होगी। यह हर वर्ष होती है। व्यापारी नियमों का यदि पालन नहीं करेंगे तथा कागजात सही नहीं रखेंगे तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इससे बचने के लिए मात्र एक ही रास्ता है कि कागजात सही रखें और सरकार के नियमों का पालन करें।
विरोध का सामना करना पड़ रहा है टीम को
दिन भर की मशक्कत के बाद सीलिंग टीम को कई बाद खाली हाथ लौटना पड़ता है तो कई बार एक या दो संस्थानों पर ही कार्रवाई कर पाती है। इस मामले कें बारे में व्यापारियों ने बताया कि सीलिंग की कार्रवाई से पहले उन्हें न तो नगर निगम और न ही दिल्ली सरकार से किसी भी प्रकार का कोई नोटिस मिला। ऐसे में सीलिंग कैसे की जा सकती है। जबकि, सीलिंग टीम का कहना है कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के आदेशों की पालन कर रही है।
कार्रवाई से बचाने में जुटे
कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) व्यापारियों के बचाव में सामने आ गया है। संगठन ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से इस मामले में आगे आकर दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग से बचाने की मांग की है। कैट ने यह भी आग्रह किया है कि 31 दिसंबर से पहले संसद के सत्र में नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ लॉज (स्पेशल प्रोविजन) थर्ड अमेंडमेंट बिल को पारित किया जाए। इससे द्वितीय अमेंडमेंट बिल-2011 में प्रस्तावित अंतिम तारीख 31 दिसम्बर 2017 को आगे बढ़ाया जा सके। इस मुद्दे पर कैट ने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, राजनाथ सिंह एवं हरदीप पुरी से मिलने का समय भी मांगा है।
वर्जन
संसद के पारित कानून को मानने को सभी बाध्य हैं। नियमों को ताक पर रखते हुए बिना कोई नोटिस या सुनवाई का मौका दिए सीलिंग की जा रही है, जो व्यापारियों के मूल अधिकार के खिलाफ है।
- प्रवीण खंडेलवाल, राष्ट्रीय महामंत्री, कैट
हाईकोर्ट से भी राहत नहीं
दिल्ली के रिहायशी इलाके डिफेंस कॉलोनी के व्यापारी सीलिंग के मुद्दे पर हाईकोर्ट पहुंचे पर उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने सीलिंग पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया। हालांकि कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति, डीडीए, एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अवकाशकालीन न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी के समक्ष डिफेंस कॉलोनी के व्यापारियों ने याचिका दायर कर निगरानी समिति के दुकानों को सील करने के आदेश को रद्द करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने समिति के आदेश पर रोक न लगाते हुए विस्तृत सुनवाई की बात कही।
नियमों को लेकर सख्त
एमसीडी का कहना है कि उसने उन्हीं दुकानों को बंद किया है, जिन्होंने कन्वर्जन चार्ज जमा न कराकर मास्टर प्लान-2021 के नियमों का उल्लंघन किया। जिन्होंने अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा ग्राउंड फ्लोर से आगे बढ़ा लिया है उपर कार्रवाई जरूरी था। डिफेंस कॉलोनी में स्थित बाजार का पहले लैंड यूज शॉपिंग कम रेजिडेंशियल था, लेकिन मास्टर प्लान 2021 के आने के बाद इस मार्केट को व्यावसायिक इस्तेमाल के मकसद से पूरी तरह स्थानीय शॉपिंग सेंटर में तब्दील कर दिया गया।
दक्षिणी दिल्ली के 106 बाजार प्रभावित
एमसीडी के अनुसार, दक्षिणी दिल्ली में ऐसे 106 मार्केट हैं, जो कन्वर्जन चार्ज नहीं दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिती के चेयरमैन केजे राव ने बताया पूरी कार्रवाई न्यायगत होगी। किसी के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। सीलिंग से पहले हर बाजार में दुकानदार की स्थिति और नियम को देखा जाएगा। यदि कोई कमी मिलेगी तभी सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
फुटपाथ पर जमा पूंजी
दिल्ली में लाखों दुकानें पर ताला लग गया है फिर लगने की तैयारी में है। इसके अलावा कई स्थानों पर बैंकों के लॉकरों में बंद लोगों की जमा पूंजी भी सील हो गई। सिलिंग की कार्रवाई उस वक्त नियमों की धौस दे बैंकों के सैकड़ों ग्राहकों के लिए परेशानी बन गई, जब लोगों के लॉकर सड़क पर पहुंच गए। सबसे चौकाने वाली बात यहां यह है कि करीब-करीब सारे बैंकों के लॉकर बेसमेंट में हैं। ऐसे में ग्राहकों की परेशानी का जिम्मेदारी कौन लेगा। ओल्ड राजेंद्र नगर में बैंक के लॉकरों में करोड़ों रुपये की पूंजी जमा है। लॉकर को ग्राहक सबसे सुरक्षित जगह मानते हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने बेसमेंट में चल रहे बैंक के लॉकरों को सील कर दिया। बैंकों के सैकड़ों ग्राहकों के सवालों का बैंक मैनेजर से लेकर सीलिंग करने वाले इंजीनियर तक के पास कोई जवाब नहीं है। राजेंद्र नगर के बैंक में ये लॉकर करीब तीस साल से हैं। ऐसे में यह नियम पहले क्यों नहीं इन बैंकों को बताए गए या इनका निरीक्षण किया गया। इन्हें किसने एनओसी दी।
व्यापारियों में दशहत
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई निगरानी समिति की सीलिंग ड्राइव से जहां व्यापारी परेशान हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई भी राजनेता नहीं जाना चाहता और कारोबारियों के साथ खुद को खड़ा दिखाने की भी मजबूरी है। निगरानी समिति ने दक्षिणी दिल्ली में 40 से ज्यादा प्रॉपर्टी को भी सील कर दिया है। व्यपारियों का आरोप है कि जिस बसेमेंट का वो कमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं उसको भी सील किया जा रहा है। व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने कन्वर्जन चार्ज जमा करा दिया है, लेकिन फिर भी सीलिंग जारी है।
10 सल पहले का चार्ज मांगा
कारोबारियों ने बताया कि जिस प्रॉपर्टी को 2014 में खरीदा है उस पर भी 10 साल पहले का कन्वर्जन चार्ज मांगा जा रहा है। कारोबारियों ने कहा कि जब दुकान 2014 में ली है फिर 10 साल का कन्वर्जन क्यों दें। कारोबारियों की परेशानी इस बात से और बढ़ गई है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सामने उनकी समस्याएं कोई सुनने वाला नहीं है। उनका कहना है कि उनकी परेशानियों और पूर्व के नियमों के आधार पर विचार करने की जरूरत है। दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और विपक्ष में बैठीं बीजेपी-कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप तो लगा रही हैं पर इसका उपाय कोई नहीं सुझा रही हैं।
आखिर सीलिंग क्यों
राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य के लिए एमसीडी से मंजूरी लेनी पड़ती है। दिल्ली में अवैध निर्माण की शिकायतों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 2005 में एक्शन का आदेश दिया था। एमसीडी का लचीला रवैया देखकर मामला सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में अवैध निर्माण की सीलिंग करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद दुकानों या व्यावसायीक प्रॉपर्टी को सीलिंग से बचाने के लिए सरकार ने कन्वर्जन चार्ज का प्रावधान किया। व्यापारियों ने चार्ज देने में लापरवाही बरती। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने सिलिंग के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया।
निर्माण गिराने के आदेश हैं
कन्वर्जन चार्ज न देने वालों का निर्माण अवैध पाए जाने की स्थिति में उसे गिराने का सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश है। नगर निगम की यह कार्रवाई मास्टर प्लान-2021 का हिस्सा है। इसके तहत खान मार्केट और डिफेंस कॉलोनी जैसे पॉश इलाकों में कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा कनॉट प्लेस जैसे व्यावसायीक इलाके में भी कार्रवाई के आदेश हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बंद की घोषणा करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में दिल्ली नगर निगम कानून 1957 के मूलभूत प्रावधानों को ताक पर रख सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।
विधानसभा में रखा विवाद
15 जनवरी को दिल्ली की विधानसभा में सीलिंग विवाद का असर देखने को मिला। आप और बीजेपी के विधायकों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और नारेबाजी की। इससे करीब दो घंटे में कार्यवाही चार बार स्थगित भी हुई। इस दौरान विपक्ष के दो विधायकों को मार्शलों ने बाहर तक निकाल दिया था।
कारोबारियों का महाबंद
सीलिंग अभियान के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में कारोबारियों ने महाबंद का भी ऐलान किया। दिल्ली के अधिकतर छोटे व बड़े बाजार बंद रखे गए। पुरानी दिल्ली के सभी थोक व रीटेल बाजार बंद रहे। बाकी दिल्ली में भी दुकानदारों ने कारोबार बंद कर विरोध जताया। कारोबारी संगठनों के इस महाबंद को आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के अलावा बीजेपी का भी समर्थन मिला। इस बंद का ऐलान कारोबारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स और उसके सहयोगी व्यापारी संगठनों ने किया था। अन्य कारोबारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री (सीटीआई) व उससे जुड़े व्यापारी संगठन भी इसमें शामिल हैं।
यहां के व्यापारी नाराज
चांदनी चौक, खारी बावली, कश्मीरी गेट, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, नई सड़क, नया बाजार, श्रद्धानंद बाजार, लाहौरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज, खान मार्केट, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, पीतमपुरा, पंजाबी बाग, राजौरी गार्डन, तिलक नगर, उत्तम नगर, जेल रोड, नारायणा, कीर्ति नगर, द्वारका, जनकपुरी, दक्षिणी दिल्ली में ग्रेटर कैलाश, साउथ एक्सटेंशन, डिफेंस कॉलोनी, हौजखास, ग्रीन पार्क, युसूस सराय, सरोजिनी नगर, तुगलकाबाद, कालकाजी के अलावा यमुनापार के लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, मयूर विहार, शाहदरा, कृष्णा नगर, गांधी नगर, दिलशाद गार्डन, लोनी रोड, सहित प्रमुख बाजारों के बंद होने की सूचनाएं मिल रही हैं।
दो हजार संगठनों ने विरोध किया
व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बंद में दिल्ली के 2000 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने हिस्सा लिया। इसमें सात लाख से ज्यादा दुकानदार व प्रतिष्ठानों ने अपनी भूमिका निभाइ और विरोध जताया। दिल्ली के छह प्रमुख इलाकों व बाजारों में धरना व प्रदर्शन का भी आयोजत किया गया। इस आंदोलन का मुख्य फोकस पुरानी दिल्ली रहा।
गुस्से में कटोरा मार्च निकाला गया
सिलिंग के विरोध में करोल बाग के टैंक रोड पर चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के पदाधिकारियों व सदस्यों ने कटोरा मार्च निकाला। सीटीआई के संयोजक बृजेश गोयल व हेमंत गुप्ता ने बताया कि पहले केंद्र सरकार और अब दिल्ली की एमसीडी की वजह से राजधानी के व्यापारियों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे में उन्हें हाथ में कटोरा लेकर गली-गली घूमने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कन्वर्जन चार्ज के नाम पर परेशान कर रहे
सीटीआई के महासचिव रमेश आहूजा व राकेश यादव के अनुसार, कन्वर्जन चार्ज के नाम पर एमसीडी खासतौर से उत्तरी एमसीडी पुरानी दिल्ली के बाजारों को निशाना बना रही है। बता दें कि इन बाजारों का रिकॉर्ड 1962 से पहले का है। तिलक बाजार, खारी बावली केमिकल मर्चेंट असोसिएशन के प्रदीप गुप्ता का कहना है कि चांदनी चौक, लाल किला, खारी बावली, जामा मस्जिद, दरियागंज, किनारी बाजार आदि सभी पुराने शहर में आते हैं। ये सभी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में शुमार हैं। अब यहां कनवर्जन चार्ज की मांग करते हुए जबरन दुकानदारों का धंधा बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सरासर गलत है। इन बाजारों को देखने के लिए विदेशों से पर्यटक आते हैं। यह बाजार नहीं पर्यटन का भी प्रमुख हिस्सा है।
ये नेता विरोध में
सीलिंग अभियान के खिलाफ चल रहे इस बंद में पार्टियां भी शामिल हैं। आप की ओर से दिल्ली संयोजक गोपाल राय व्यापारियों के साथ में खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री इमरान हुसैन और चांदनी चौक की पूर्व विधायक अलका लांबा चांदनी चौक इलाके में धरना दे व्यापारियों की समस्या को उठा रहे हैं। हालांकि ये सभी स्पष्ट तौर पर विरोध नहीं करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में इसे एक राजनीतिक व्यवहार के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आप नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सभी 70 विधानसभाओं में सीलिंग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने माना कि सीलिंग से कारोबारी बुरी तरह त्रस्त हैं इसलिए इस बंद को उनका नैतिक समर्थन है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि उनकी पार्टी कारोबारियों के दुख के साथ है। हमारे नेता व कार्यकर्ता भी विभिन्न बाजारों में जाकर बंद के खिलाफ विरोध दर्ज करेंगे।
7 लाख व्यापारी नाराज
दिल्ली में हो रही सीलिंग के विरोध में 2000 से अधिक व्यापारिक संगठनों के 7 लाख से ज्यादा व्यापारी नाराज हैं। थोक बाजार और रिटेल बाजार सभी के ये व्यापारी नगर निगम की इस कार्रवाई से खासे नाराज हैं। इन 7 लाख व्यापारियों ने विरोध के तौर पर दिल्ली व्यापार बंद का आयोजन भी किया। जिसका सीधा असर छोटे दुकानदार, मजदूरों और ट्रांसपोर्टरों पर पड़ा। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि राजधानी के 60 से ज्यादा बड़े और बाजारों के व्यापारी नाराज हैं। इन व्यापारियों की मांग है कि सरकार दिल्ली के व्यापार को सीलिंग से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
अधिकारियों का आरोप
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर व्यापारियों की संपत्ति की जांच की तो पता चला कि जिन संपत्तियों को घर की तरह बसाया गया है, उसमें एक दो दिन में ही नए-नए बेड और सोफे सजाए गए हैं। इनका हूलिया हाल ही में बदला गया है। दुकान को व्यापारी बेडरूम बना रहा हैं तो कोई दफ्तर को घर के तौर पर प्रयोग कर रहा है। इस तरह के सबसे अधिक मामले पुराना राजेंद्र नगर में सीलिंग अभियान के दौरान देखने को मिला। जब अधिकारियों ने जांच की तो संपत्ति में व्यावसायिक गतिविधि होने की पुष्टि हुई। इसके अलावा विवादित संपत्तियों की जांच में यह भी सामने आया कि बिजली और पानी का मीटर कनेक्शन व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लिया गया है। कई जगह पर पानी का कनेक्शन घरेलू मिला।
पूरी दिल्ली में असर
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित सीलिंग कमिटी में शामिल डॉ. भूरे लाल का का कहना है कि दिल्ली में जरूरतों के अनुसार और नियमों के तहत सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है। कोई भी कार्रवाई नियम विरुद्ध नहीं हो रही है। डॉ. भूरे लाल ने कहा कि कई जगहों पर अप्रूवल प्लान और मौजूदा स्थिति को देखने के बाद तय हो रहा है कि सीलिंग कहां करें। विरोध के बावजूद इस समिति ने पिछली बार भी काम किया था और इस बार भी काम कर रहे हैं।
कन्वर्जन शुल्क पर बोले माकन
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने सीलिंग के विरोध में केंद्र सरकार से कन्वर्जन शुल्क 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से हर व्यपारी शुल्क दे सकेगा। उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को दिल्ली में हो रही सीलिंग और तोड़फोड़ के संबंध में पत्र भी लिखा। हालांकि इसका कोई असर दिखता नजर नहीं आया। इसे लोगों ने एक राजनीतिक हथकंडे के तौर पर ही देखा।
सीलिंग का मामला काफी उलझाउ : सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली में सीलिंग का मामला बेहद उल
झा हुआ है और इस मामले में व्यापक सुनवाई की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली सीलिंग मामले की सुनवाई के दौरान की। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिवक्ता अनीता शिनॉय और एडीएन रॉव को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) बनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वो एमिकस क्यूरी को हर सुनवाई पर 35 हजार दे।
- 2013 में सीलिंग के मामलों को हाईकोर्ट, निचली अदालतों और निगम के ट्रिब्यूनल को भेजा दिया था
- 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कुछ मामले की सुनवाई न्याय मित्र के द्वारा की जाएगी
- 2006 में भी एमसीडी ने बड़े पैमाने पर सीलिंग अभियान चलाया और हजारों दुकानों को सील कर दिया गया
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