जिन्दगी को चिता बना जाते हैं।

चंद गुजरे हुए पल, रूला जाते हैं।
वो फिर न कभी लौटेगे जता जाते हैं।
रिश्तोंे का विलगाव दिल को जला जाते हैं।
अपने ही पराएं हैं बता जाते हैं।
सभी कुछ दशकों में चलें जाएंगे छोड़कर।
कुछ लोग पलभर में ही हमें छोड़ तड़पा जाते हैं।
सपनों सा लगने वाले ये खुशनुमे अपने ही हैं।
पर दूर होकर रूह में आग लगा जाते हैं।
रिश्तों की भीड़ में हम एक अपना बना लेते हैं।
पर उसे जता कर भी जता नहीं पाते और जिन्दगी को चिता बना जाते हैं।

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