सेहत के लिए किडनी का तंदरूस्‍त रहना जरूरी




तनाव, अवसाद, अनियमित दिनचर्या व खानपान आज अनेकों बीमारियों को बल दे रहे हैं। ऐसे में किडनी से जूड़ी बीमारियां आज आम होती जा रही हैं। किडनी यानी गुर्दे की बीमारी एक गैर-संचारी रोग है। आज दुनिया में करीब 850 मिलियन लोग किड़नी के संक्रमण से प्रभावित हैं। हर दस वयस्क में से एक क्रोनिक किडनी रोग से पीडि़त है। ऐसा माना जा रहा है कि 2040 तक यह वैश्विक स्‍तर पर जोखिम के सबसे बड़े कारणों में से एक हो जाएगा।    
    आपको यह जानकर हैरत होगी कि आज डायलिसिस और कीडनी प्रत्यारोपण पर कई देश वार्षिक स्वास्थ्य देखभाल बजट का 2 से 3% खपत कर रहे हैं। अनुमानत: यह लगातार बढ़ता हुआ खतरा है। ऐसे में आपको अब सचेत होकर अपने स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल की काफी जरूरत है। मणिपाल हॉस्पिटल्स के चिकित्‍सकों ने बताया कि विश्‍व किडनी दिवस हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। इसके तहत दुनिया में किडनी रोग के प्रभाव व स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर वैश्विक जागरूकता अभियान आयोजित किया जाता है। चिकित्‍सक बताते हैं कि मणिपाल हॉस्पिटल्स किडनी रोग के सिघ्र उपचार और रोकथाम के लिए हर ठोस उपाय की वकालत करता है। यह स्‍थस्‍थ भारत के सपने को साकार करने के लिए सदैव तत्‍पर रहता है। मणिपाल हॉस्पिटल्स के चिकित्‍सकों को कहना है कि इस मर्ज को स्‍वस्‍थ जीवन शैली अपनाकर ही रोका जा सकता है। इसके अलावा किडनी की कार्य क्षमता की रुटीन जांच करना काफी आवश्‍यक है। इसके अलावा किडनी रोगियों की आर्थिक परेशानी में भी मणिपाल हॉस्पिटल्स मदद करता है, ताकि मरीज व तीमारदार संस्‍थागत व सरकारी मदद आसानी से प्राप्‍त कर सकें। इसके अलावा मणिपाल हॉस्पिटल्स डायलिसिस और प्रत्‍यारोपण के लिए आसान पहुंच वाली पारदर्शी नीति पर कार्य करता है।    


बड़ रहा खौफ
·       आज दुनिया में मौत का छठवां सबसे तेजी से बढ़ता कारक दीर्घकालिक किडनी रोग है।
·       दुनिया में हर साल करीब 1.7 मिलियन लोगों की जान तीव्र किडनी क्षति के कारण चली जाती है।
·       किडनी की बीमारी साइलेंट किलर की तरह जीवन में दखल देती है और बिना संकेत व लक्षण के आघात पहुंचाती है।
·       क्रोनिक किडनी रोग ऐसे तो पूरा ठीक नहीं होता, फिर भी रोग की जांच के लिए रक्‍त व मूत्र परीक्षण जरूर कराते रहना चाहिए।
·       कीडनी रोग यदि शुरुआत में ही पकड़ में आ गई तो इसे ठीक किया जा सकता है।
·       शुगर और ब्‍लड प्रेशर क्रोनिक किड़नी रोग के लिए काफी घातक मर्ज हैं। 



डायलिसिस बनी चुनौती 
मणिपाल हॉस्पिटल्स के चिकित्‍सकों ने बताया कि किडनी की बीमारी काफी गंभीर और महंगी है। इसके अलावा दुनियाभर में किडनी रोग के बढ़ते बोझ ने इसे और गंभीर रूप दे दिया है। सबसे बड़ी बात की किडनी प्रत्‍यारोपण काफी महंगा है, जो आम लोगों के लिए चिंतनीय हो जाता है। इसके अलावा अंग दाता की उपल‍ब्‍धता और डायलिसिस बैकअप काफी जटिल समस्‍या है। यही नहीं, अंगदान की प्र‍वृति भारत में बहुत कम है। सांस्‍कृतिक पूर्वाग्रह से आज भी हमारा देश जूझ रहा है। इससे अब जागरूक होकर लोगों को अंगदान व रक्‍तदान के लिए आगे आने की काफी जरूरत है।  


क्रोनिक किडनी रोग है घातक
क्रोनिक किडनी रोग महीना या वर्षों से लगातार जारी एक क्षति है। मणिपाल हॉस्पिटल्स के चिकित्‍सकों के अनुसार, इसमें किडनी प्रक्रिया अपने विशेष स्‍तर से कम प्रभावकारी हो जाती है। ऐसे में अनुपचारित किडनी की विफलता जीवन के लिए घातक होती है। इस अवस्‍था में जीवन बचाने के लिए डायलिसिस या किडनी प्रतयारोपण की जरूरत पड़ती है। मणिपाल हॉस्पिटल्स के चिकित्‍सक बताते हैं कि क्रोनिक किडनी रोग शुगर, ब्‍लड प्रेशर, तनाव व अन्‍य कारणों से होते हैं। इसके दुष्‍परिणाम से आपकी जागरूकता और समय-समय पर स्‍वास्‍थ्‍य जांच बचा सकते हैं। आपको बता दें कि भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रमचलाया जाता है। इसके तहत आर्थिक मदद दी जाती है।


मणिपाल हॉस्पिटल्स है आपके सेहत का साथ

मणिपाल हॉस्पिटल्स के चिकित्‍सकों ने बताया कि हमारे यहां किडनी से जुड़े उपचार के लिए अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के अत्‍याधुनिक उपकरण व विशेषज्ञ मौजूद हैं। इसके अलावा मणिपाल हॉस्पिटल्स मान‍वीय मूल्‍यों के आधार पर कार्य कर लोगों की सेवा में भी अहम भूमिका अदा करता है। मणिपाल हॉस्पिटल्स के  नेफ्रोलॉजी की टीम काफी अनुभवी और दक्ष है। यहां किडनी से जुड़े हर मर्ज के साथ प्रत्‍यारोपण की आधुनिक सुविधा भी उपलब्‍ध है। इसके अलावा परंपरागत नेफ्रोलॉजी रेडियोलॉजिस्‍ट और यूरोलॉजिस्‍ट के साथ मिलकर उपचार करते हैं। मणिपाल हॉस्पिटल्स में आपको हीमोडयलिसिस की बेहतर सुविधा प्राप्‍त होती है। इसके अलावा किड़नी से जुड़े अन्‍य जरूरी उपचार भी यहां मौजूद है, जिसका भरोसा आज हर मरीज करता है।     


बढ़ती समस्‍या
·       हमारे देश में करीब 14 प्रतिशत महिलाएं किडनी की दिक्‍कत से परेशान हैं।
·       भारत में 12 प्रतिशत पुरुषों को नेफ्रोलॉजी से जुड़ी समस्‍या है।
·       दुनिया में 19.5 करोड़ महिलाएं किडनी की बीमारी से पीडि़त हैं।
·       हमारे देश में हर साल दो लाग लोग किडनी की बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं।

बीमारी को कैसे पहचानें
·       उल्‍टी आना
·       भूख का न लगना
·       थकान और कमजोरी
·       पेशाब का कम होना
·       खुजली की दिक्‍कत
·       नींद में कमी
·       मांसपेशियों में खिंचाव


इससे बचें
·       अनियमित जीवनचर्या व खानपान
·       कोई भी पानी पी लेना
·       डिब्‍बा बंद भोजन करना
·       चिप्‍स, नमकीन, अचार व चटनी कम खाएं
·       प्रो‍टीन, सोडियम, पो‍टेशियम, कैल्शियम, फास्‍फोरस व तरल चीजों का ख्‍याल रखें
·       ब्‍लड प्रेशर 120/80 पर रखें

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