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Showing posts from November, 2019

तकनीक के साथ चलें, बेहतर को चुनें

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·        बीएस 4 और 6 से बनाएं राहों को आसान ·        पॉल्‍यूशन और महंगाई पर लगाएं विराम      जीवन की बदलती जरूरतों के साथ ही तकनीकी बदलाव भी जारी रहता है। इसी क्रम में आज हमारे जीवन को रफ्तार देने वाले वाहन भी तकनीकी तौर पर बदल रहे हैं। ये जहां इकोफ्रेंडरी हो रहे हैं वहीं हमारी जेब का भी ख्‍याल रख रहे हैं। कम तेल में ज्‍यादा माइलेज और बेहतर ताकत के साथ प्रदूषण रहित आज की गाडि़यां हमें एक बेहतर विकल्‍प के तौर पर नजर आती हैं। ऐसे में आपका चुनाव मजबूत और अच्‍छे इंजन का रहता है , जिसे बीएस-4 और बीएस-6 पूरा करते हैं।      अगले साल के अप्रैल माह से हमारे देश में बीएस-6 मानक वाली गाडि़यां बिकने शुरू हो जाएंगी। हालांकि पहले से खरीदी गईं बीएस-4 गाडि़यां चलती रहेंगी। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर बीएस है क्‍या। सबसे पहले तो यह जान लें कि बीएस का अर्थ भारत स्‍टेज है। इससे आप यह तो जान गए होंगे कि यह नाम उत्‍सर्जन के मानकों की तरफ इशारा कर रहा है। यानी अगला जनरेशन बीएस-6 में विश...

हाथ की धुलाई से होगी बीमारियों की सफाई

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जिंदगी की भागमभाग में कई बार ऐसा होता है कि हम अपना ख्याल नहीं रख पाते। जैसे इस दौरान नाश्ता करने या खाना खाते वक्त अपना हाथ धोना भूल जाते हैं। खासकर स्ट्रीट फूड का स्वाद लेते हुए तो जरूर हाथ धोने को जरूरी नहीं समझते। क्लास में अक्सर हाथ धोए बिना कुछ भी खा लेते हैं। कई बार अपने बच्चे को खेलाते वक्त जब नाश्ता करते हैं तो हाथ धोना भूल जाते हैं। पर क्या आपको पता है कि आपकी यह छोटी सी भूल आपको और आपके अपनों को बीमार कर सकती है। तो आप अब से ही सही , पर सचेत हो जाएं। कुछ भी खाने से पहले अपना हाथ धोएं। हाथों को स्वच्छ रखें , खुद को स्वस्थ रखें।           हमारे माता-पिता या गार्जियन बचपन से ही अक्सर खाना खाने से पहले या कुछ भी काम करने के बाद हाथ धोने के लिए जरूर कहते हैं। इसे अच्छी आदत के तौर पर हमें सीख देते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि स्वच्छ घर है तो स्‍वस्‍थ घर है। स्वच्छता और सेहत को लेकर जब आप दृढ निश्चयी होंगे , तभी भारत स्वच्छ व स्‍वस्‍थ बनेगा। हमें और बच्चों को यह समझना होगा कि हमारे हाथों के माध्यम से कई तरह के बैक्टीरिया व कीटाण...

स्वास्‍थ्‍य के लिए स्वच्छ जल चाहिए

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बीमारी और स्वास्‍थ्‍य के लिए स्वच्छ पानी का सेवन बहुत जरूरी है। ऐसे में आपको ही यह सुनिश्चित करना होगा कि आप जो पानी पी रहे हैं वह कितना स्वच्छ‍ है। या फिर आप अपने प्रयोग में लिए जा रहे जल को कहां संचय कर रहे हैं। घर की टंकी, पाइप और नल कैसा है। कहीं लिकेज तो नहीं है। उसकी सफाई है की नहीं। आपको यह तो पता ही है कि भारत में पेयजल के रूप में मानसूनी वर्षा का विशेष योगदान है। ऐसे में वर्षा जल का समुचित संग्रह और संचयन पर भी जोर देने की जरूरत है। अत: जब हम जल की बर्बादी को रोकेंगे और स्वच्छ जल का ही सेवन करेंगे, तभी हम और हमारा देश स्वस्थ और खुशहाल हो पाएगा।         आपको यह जानने की जरूरत है कि देश में सन 2025 में अपनी विभिन्न आवश्कताओं की पूर्ति के लिए 1027 अरब घन मीटर पानी की जरूरत पड़ने वाली है। इस संकट से आप-हम, किसान और सरकार मिलकर ही लड़ पाएंगे। ऐसे में हमें पानी की एक-एक बूंद को बचाने की जरूरत है। पानी की कमी से दुनिया सूखा, वायरल, गंभीर बीमारी, प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में आप सतर्क हो जाइए और पानी को बिल्कुल भी बर्बाद न कीजि...