इन लोगों का दूर होना आपको बहुत दूखी कर देगा

 
जीवन का प्रारंभ आकर्षण और प्रेम के मार्ग से होता हैैै। पहला आकर्षण मां से होता है। जब हमारे विचार, भाव और मन:स्थिति का निर्माण हो रहा होता है, उस अवस्‍था में मां ही ऐसी जीव व शक्ति होती जो हमारे मन भाव में 24 घंटें केंद्रित रहती हैैै। उसकी आत्‍मा से हम जुदा हो जिस शरीर में बसते हैैं, वो आत्‍मा अपनेे आवास स्‍थान को जीवन पर्यंत याद रखती है। हमारी आत्‍मा हर वकत मां से जुड़कर अपने विचार को जीती है। बस उसी से प्रेम करती हैैै। उसी के प्रति समर्पित रहती हैैै।
ऐसे में मां के शरीर त्‍यागने के दौरान हम सबसे ज्‍यादा टूटते हैैं। क्‍योंकि वह हमारी ब्रह्मा हैैै। उसी ने हमारा निर्माण किया। हमें जीवन दिया। अत: हम मां का मात्र जीव स्‍वरूप हैंं। ऐसे में उस वेदना को हम कभी व्‍यक्‍त नहीं कर सकते। वह हमारी पहली गुुुुुरु बन हमें जीवन जीने के काबिल बनाती हैैै। वह हमारी हर गलती पर सीख बन हमें प्रोढ़ बनाती है। उसके जाने का गम आंखों से सागर इतना जल निकल जाने के बाद भी पूर्ववत बना रहता हैैैै। मां। मां शब्‍द अपने आप में पूर्ण लगता है। यह संपूर्ण धर्मों में सर्वोपरि मंत्र हैैै। आत्‍म पवित्रता का अंश हैै यह। मां के उच्‍चरण मात्र से ही मानों आत्‍मा प्रेम, त्‍याग, ममता, करूणा, स्‍नेह आदि दैवीय गुणों से भर जाती है।
दूसरा पत्‍नी है। जो अपना संपूर्ण जीवन व मनोरथ त्‍याग एक घर का निर्माण करती हैैै। किसी मानव को अपने देश से दूर समुद्र के बीच किसी टापू पर छोड़ दो। जहां अन्‍य सभी जीव अनजाने हों। उसकी ओर घूर रहे हों। सब उसे अपनेे खेमें में खींच रहे हों। कुछ गलती पर यातना दे रहें हों। अनजानों के इस सोर में वह बैठी एक इंसान की तरफ आशा के भाव से देखती हो। वह भी अन्‍य लोगों की तरफ मुस्‍कुरा रहा हो पर पत्‍नी को देख जिम्‍मेदारी का दर्द समझ गंभीर भाव लिए रुखे मन से देखता हो। ऐसी स्थिति में वह पत्‍नी कल सब अच्‍छा हो जाएगा, की आशा लिए एक एक दिन काटती जाती हैैैै। मां-पिता को स्‍मरणों में बसा, भाई-बहन को यादों में सजा। वह जीती हैैै। अपने रिश्‍ते व रिश्‍तेदारों को मन में बैठा, मौन भाव से अपनी जवानी उस अनजाने घर पर न्‍यौछावर कर देती हैैैै। कर्म, वचन, शरीर हर प्रकार से खुद का दोहन करा, उस घर में मुस्‍कुराती फिरती हैैै। अपने घर को पराया पराया सुन, खुद भी पराया घर बोलने पर विवस हो आशा की दृष्टि को धूंधला कर लेेेेती है। पराये घर को अपना-अपना सुनते हुए उसे अपनाने के लिए भावनाओं की सारी हदें पार कर संपूर्ण न्‍यौछावर हो जाती है। ऐसे में उसके रहने पर जो महसूस नहीं हो पाता, उसके शरीर त्‍याग के बाद विलाप बनकर पूरेे घर को रूला जाता है। पति के हृदय को आघात के तौर पर जता जाता है।
ये दोनों रिश्‍तेे वास्‍तव में सबको रुला जाते हैैंं। ऐसे में इनकी उपयोगिता को इनकी मौत के बाद नहीं अभी और तुरंत समझ खुद को बदलने की कोशिश करनी चाहिए।

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