उनकी नजरें हमें इबादत लगती
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| aditya dev |
सुबह की उनकी नजरें हमें इबादत लगती हैं।
वो कहतीं हैं कि आपको आशिकी की आदत लगती है।।
आंखों को जो दो पल देखूं न उनकी।
तो वो घबराकर मोबाइल में चेहरे की जांच करती हैं।।
उन्हें पसन्द है बालों को, ज़ुल्फ़, नजर को निगाह सुनना।
अपनी आँखों को समुन्द्र और ओठों को मीठा सुनना।।
हुस्न एक दिन ढल जाएगा ये उनकी नासमझी को याद नहीं।
उंगलियां मेरी उंगलियों में फंसकर उन्हें पसन्द है घण्टों बात करना।।
लिबास, आंखें, वो बालियों की तारीफ सुनना।
उन्हें पसन्द है हथेलियों की लकीरों में हर वक्त मुझे खोजना।।
पर ताज्जुब नहीं तारीफों का सिकन्दर जब आएगा।
उन्हें नापसन्द होगी मेरे हर अल्फाज, बातें और तारीफों का आईना।
क्या है उम्मीद यह तुझसे पहली मुलाकात में जाना
खताओं की बारिश तब सेे शुरू है वो आज जाना।।
सपने अच्छे भी हैैं वो तेेेेरी जादुईं बातों से जाना
जुर्म का बादशाह बन गया हूं ये तेरे छलावे से जाना।।
खुशी को तूं और तेरी हर बात को खुशी माना
तेरे गिले-सिकवों से गमें रात को जाना।।
महफिल, इश्क, इबादत क्या है तेरी मुलाकात से जाना
आंशू, गम, शहादत को तेरे तिरस्कार से जाना।।

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