तुम पुत्र वत्‍सला हो

हमारी बड़ी माता जी स्‍व. श्रीमति विमला पांडेय।

स्‍मरणों के कुहरे में रिश्‍ते की तुम गर्माहट हो
प्रेम
, त्‍याग, मनोरथ की तुम तो अभिलाषा हो।।
तेरे आंचल की छाया ने हमको पाला हमको पोसा
तेरे चरणों के रज ने ही हमारे मन वैभव को सींचा।।
तुम कर्म साध्‍वी
, धर्म वैभवी, हम सब की प्रिय माता हो
तुमने प्‍यार के रज्‍जू से हमें बांधा
, तुम तो चांद सितारा हो।।

हर रोशनी को हम सब में बराबर बांटा
किरणों सा उज्‍ज्‍वल किया हमारा जीवन।
मिलकर चलना सिखलाया बस
कर दिया हम पर अपने को पूर्ण समर्पण।।

कर्मठता का होती है हमने जाना तुमको पाकर
निरंतरता को समझा तुम्‍हारे साथ वक्‍त बिताकर।
तुम अनसुइया
, सति-सवित्री, तुम पुत्र वत्‍सला हो
तुम्‍हारे चरणों के हम दास तुमसे ही मानवता को सीखा है।।

स्‍मरणों के कुहरे में रिश्‍ते की तुम गर्माहट हो
प्रेम
, त्‍याग, मनोरथ की तुम तो अभिलाषा हो।।

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