क्या आपका चढ़ाया भोग भगवान खाते हैैं, जरूर जानें कैसे खाते हैं वो

आदित्‍य देव/ Aditya Dev
हां। जरूर करते हैैं। कई बार आप घर से भोजन करके किसी रिश्‍तेदार व दोस्‍तों के यहां जाते हैं। वहां आपको भोजन के लिए कोई न पूछे, जबकि उस वक्‍त खाने का समय हो। फिर आपको बहुत बुरा लगेगा, जबकि आपको उस वक्‍त उस भोजन की जरूरत नहीं हैैै। फिर क्‍यों आपमें यह नाराजगी। हमें विश्‍वास है कि हमारे भगवान हमारे साथ हैं। वह हमेंशा हमारे आसपास ही रहते हैैं। हर वक्‍त। जब हमें काम करते हैैं। दौड़ते हैं। घूमते हैैं। आराम या नौकरी कर रहे होते हैैं। फिर वो भी थकते होंगे न। ऐसे में वह भोग लेते हैैं। यदि आप उन्‍हें भोग नहीं कराएंगे तो उन्‍हें भी तो नाराजगी हो सकती हैैै। पर हमारे भगवान भोले, प्‍यारे व खुशमिजाज हैैं। वो अपनी संतानों से कभी नाराज नहीं होते। वह आपकी हर गलती क्षमा करते हैं। जैसे बच्‍चे गलती करते हैैं तो पिता जी व माता जी उन्‍हें मारते या दंड नहीं देते, बल्कि उन्‍हें संभालते हैैं। अच्‍छी चीज बताते हैैं। वैसे ही भगवान भी आपकी किसी गलती पर आपको दंड नहीं देते। वह आपके सबसे अच्‍छे और करीबी पालनकर्ता हैं। न मंत्र गलत होने पर न पूजा विधि पर। यह भ्रम निकाल दें। कौन पिता व माता गलत उच्‍चरण पर गुस्‍सा होता हैैै। वह तो अपने बच्‍चों की बात को समझ लेता हैै और उसे पूरा करता हैैै। अत: आपने सुबह व शाम जो भी अपने लिए बनाया है न, बस उसी में से थोड़ा सा आपके साथ मौजूूूद भगवान को जरूर खिलाएं। सबसे पहले उन्‍हें एक आसन दें जहां वो बैठ सकें। उनके पैर और हाथ को धोनेे के लिए जल का छिड़काव करें। फिर भोजन कराएं। इसके बाद उनका हाथ धुलाएं। इसके पश्‍चात आप सपरिवार ही भोजन करें। कभी भी अकेले भोजन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि आत्‍मा ही परमात्‍मा हैैै। आपके आसपास जो भी सदस्‍य व जीव हैैं सभी उसी परमात्‍मा का रूप हैं। ऐसे में जो पहले खाएगा, उसकी तरफ अन्‍य देव व ऊर्जाएं आकर्षित होंगी। ऐसे में सब मिलजुलकर एक साथ भोजन करें। आपको स्‍वर्ग की खुशी का आभास होगा। आप आनंद को पाएंगे।

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